Wednesday, December 3, 2008

घेर कर मार दिये जाने के बाद

मुंबईत झालेल्या दहशतवादी हल्ल्यानंतर एका पत्रकाराने त्याच्या ब्लॉगवर लिहिलेले हे वास्तव. आपल्या सर्वांशी शेअर करण्याची इच्छा होती म्हणून, त्यानं लिहिलेलं वास्तव मी तुमच्यासाठी माझ्या ब्लॉगवर टाकत आहे.

घेर कर मार दिये जाने के बाद
मुझे अब डर नहीं लगता है
घेर कर मार दिये जाने से
देखते देखते कितने मर गए
अपनी ही आंखों के सामने
जानता हूं मार दिए जाने के बाद
आना जाना होगा कुछ नेताओं का
कुछ कहानियां मेरे बारे में छप जाएंगी
मुआवज़ों की राशि कोई बढ़ा जाएगा
मेरे दोस्तों को बहुत गुस्सा आएगा
आतंकवाद और राजनेताओं की करतूत पर
मैं आराम से पड़ा रहूंगा
कहीं पर किसी स्टेशन या किसी
मॉल के बीचों बीच ख़ून से लथपथ,
आंखें बाहर निकलीं होंगी पर्स
में अपनों की तस्वीरों के नीचे
दोस्तों के पते मिलेंगे और
सरकारी नोट एटीएम की
दो चार रसीदें होंगी और
साथ में थैला, जिसमें होगा
वो खिलौना जो मैंने खरीदे हैं
अपनी बेटी के लिए
मोबाइल फोन में आया
वो आखिरी एसएमएस
मेरे दोस्तों का, तुम कहां हो,
जल्दी बताना मेरी बीबी का
मिस्ड कॉलदो लोग उठा कर
रख देंगे मुझे स्ट्रेचर पर और
अपडेट कर देंगे मरने वालों
की संख्या और सूची भेजा जाऊंगा
पोस्टमार्टम के लिए
कितनी लगीं गोलियां
और कितने बजे पता लगा लिया जाएगा
ठीक ठीक मैं
रवीश कुमार, दिल्ली के एक मॉल में
घेर का मार दिया गया आतंकवादी हमले में

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